रामानंद सागर की ऐतिहासिक 'रामायण' ने भारतीय टेलीविजन इतिहास को ऐसा गोल्डन पीरियड दिया, जिसने इसमें काम करने वाले हर छोटे-बड़े कलाकार को घर-घर में अमर कर दिया। उस दौर में लोग इन कलाकारों को सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि साक्षात भगवान का रूप मानने लगे थे, लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि जहां कुछ सितारे आज भी शोहरत की बुलंदियों पर हैं, वहीं कुछ ऐसे भी फनकार रहे जिन्हें पहचान तो मिली, लेकिन वह लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में टिक नहीं सके। आज हम बात कर रहे हैं 'रामायण' में जटायु समेत कई महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले बेहतरीन अभिनेता सुनील वर्मा की। कभी ऐसा दौर था जब सुनील वर्मा को देखकर बुजुर्ग तक उनके पैरों में गिर जाते थे, लेकिन आज यह टैलेंटेड एक्टर गुमनामी के अंधेरे में सिमट कर रह गया है और गुजारे के लिए छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स करने को मजबूर है।
विरासत में मिली एक्टिंग और मुंबई का सफर
सुनील वर्मा को अभिनय कला विरासत में मिली थी। उनके पिता खुद एक अभिनेता थे, जिन्होंने मशहूर अभिनेता अशोक कुमार के प्रोडक्शन की फिल्म 'बंदिनी' में एक डॉक्टर की भूमिका निभाई थी। यही वजह थी कि जब सुनील ने एक्टिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया तो उन्हें पूरे परिवार का भरपूर सहयोग मिला। पढ़ाई के साथ-साथ वह लगातार नाटकों में हिस्सा लेते रहे और दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भी नजर आए। स्थानीय स्तर पर लोगों से मिले प्रोत्साहन के बाद वह अपनी किस्मत आजमाने सपनों की नगरी मुंबई पहुंच गए। मुंबई आकर उन्होंने मशहूर पृथ्वी थिएटर में नाटकों में काम करना शुरू किया, जहां उनके अभिनय को काफी सराहा गया।
विजय काविश ने बदली किस्मत और मिला 'रामायण'
पृथ्वी थिएटर में काम करने के दौरान ही सुनील वर्मा की मुलाकात अभिनेता विजय काविश से हुई, जिन्होंने 'रामायण' में भगवान शिव की भूमिका निभाई थी। दोनों ने साथ में एक नाटक में काम किया था। विजय काविश ने सुनील के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रामानंद सागर के ऑफिस आने का न्योता दिया। इसके बाद विजय काविश उन्हें लेकर रामानंद सागर से मिलने पहुंचे, जहां उन्हें गुजरात के उमरगांव आने को कहा गया। उमरगांव में सुनील वर्मा का पहला ऑडिशन 'इंद्रदेव' के किरदार के लिए हुआ। रामानंद सागर को उनका ऑडिशन इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत सुनील को शो का हिस्सा बना लिया।
एक ही शो में निभाए कई चुनौतीपूर्ण किरदार
'रामायण' में सुनील वर्मा केवल एक रोल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इस धारावाहिक में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए करीब 6 अलग-अलग किरदार निभाए। उन्होंने इंद्रदेव के बाद गरुण देवता और सबसे भावुक कर देने वाला 'जटायु' का किरदार निभाया। इसके अलावा वह रावण के बेटे, च्यवन ऋषि और सुतिक्ष मुनि के रूप में भी नजर आए। जटायु के किरदार को निभाने में उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। भारी-भरकम मुकुट और कॉस्ट्यूम के कारण वह अपनी गर्दन तक नहीं हिला पाते थे, उन्हें सिर्फ आंखें घुमाकर अभिनय करना पड़ता था। जटायु के उड़ने वाले दृश्यों को लेकर लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने एक बार साझा किया था, 'जटायु का कॉस्ट्यूम बहुत भारी था। पहले उस कॉस्ट्यूम में एक्टर के हाथ बांधे जाते थे ताकि वह पंखों को हिला सकें और फिर उन्हें हुक की मदद से हवा में उड़ाया जाता था।' यह बेहद जोखिम भरा और थका देने वाला काम था।
जटायु का कॉस्ट्यूम बहुत भारी था। पहले उस कॉस्ट्यूम में एक्टर के हाथ बांधे जाते थे ताकि वह पंखों को हिला सकें और फिर उन्हें हुक की मदद से हवा में उड़ाया जाता था।

बड़े सितारों के साथ काम और हिंदी सिनेमा का दौर
'रामायण' की अपार सफलता के बाद सुनील वर्मा ने रामानंद सागर के साथ 'उत्तर रामायण' में भी काम किया। इसके बाद उन्हें 'श्री कृष्णा' में भी एक रोल ऑफर हुआ था, लेकिन व्यस्तता के कारण वह इसे नहीं कर सके। उस दौर में वह संजय खान की फिल्म 'सरजमीं' की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना उनके बड़े भाई की भूमिका में थे। इसके अलावा सुनील वर्मा ने संजय खान के मशहूर ऐतिहासिक सीरियल 'टीपू सुल्तान' में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा। फिल्मों की बात करें तो उन्होंने 'हथियार', 'फतेह' और दिव्या भारती की आखिरी सुपरहिट फिल्म 'रंग' जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया, जहां उन्हें जितेंद्र, अमृता सिंह और आयशा जुल्का जैसे बड़े सितारों के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला।
काम की कमी और पटना में गुमनाम जिंदगी
समय बीतने के साथ-साथ सुनील वर्मा को बड़े बैनर की फिल्मों और टीवी शोज में काम मिलना बेहद कम हो गया। वह मुख्यधारा के अभिनय से कटकर कमर्शियल्स की तरफ मुड़ गए, लेकिन वहां भी वह ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चकाचौंध की दुनिया से दूर अब सुनील वर्मा बिहार की राजधानी पटना में अपना जीवन गुजार रहे हैं। आर्थिक तंगी और गुजारे के संकट के कारण आज वह बी-ग्रेड फिल्मों में काम करने को भी मजबूर हैं, जिनमें 'आई एम ए प्ले गर्ल' जैसी फिल्में शामिल हैं। इस बात का जिक्र खुद सुनील वर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी किया है। हालांकि अपनी इस स्थिति और संघर्ष को लेकर सुनील वर्मा ने एक इंटरव्यू में खुलकर बात करते हुए कहा था, 'इन छोटे-मोटे एक्टिंग प्रोजेक्ट्स के अलावा मैं अपनी आजीविका चलाने के लिए अपना एक छोटा बिजनेस भी संभाल रहा हूं।'
इन छोटे-मोटे एक्टिंग प्रोजेक्ट्स के अलावा मैं अपनी आजीविका चलाने के लिए अपना एक छोटा बिजनेस भी संभाल रहा हूं।
ये भी पढ़ें: कौन थे दिग्गज डायरेक्टर अनिक दत्ता? जिनकी फिल्म ने जीते 2 नेशनल अवॉर्ड, दर्दनाक रहा अंत, छत से गिर कर गई जान